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सद्भाव, समता और सत्य का अमर संदेश हैं संत कबीर: 628वीं जयंती पर श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा श्री सद्गुरु कबीर साहेब का प्राकट्य दिवस

छत्तीसगढ़ कौशल न्युज  सत्यनारायण पटेल ...भाटापारा: - संत शिरोमणि, महान समाज सुधारक एवं निर्गुण भक्ति धारा के प्रणेता श्री सद्गुरु कबीर साहे...


छत्तीसगढ़ कौशल न्युज 

सत्यनारायण पटेल ...भाटापारा: - संत शिरोमणि, महान समाज सुधारक एवं निर्गुण भक्ति धारा के प्रणेता श्री सद्गुरु कबीर साहेब की 628वीं प्राकट्य जयंती श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर कबीरपंथी समाज सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा सत्संग, भजन-कीर्तन, शोभायात्रा, गुरु वंदना, प्रवचन तथा महाप्रसाद जैसे विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु कबीर साहेब के बताए सत्य, प्रेम, समता और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लेंगे।

    संत कबीर ने अपने संपूर्ण जीवन में जाति-पांति, ऊंच-नीच, अंधविश्वास, पाखंड और सामाजिक कुरीतियों का विरोध करते हुए मानव मात्र को प्रेम, भाईचारे और सदाचार का संदेश दिया। उनकी वाणी आज भी समाज को सत्य, नैतिकता और मानवता की राह दिखाने वाली अमूल्य धरोहर मानी जाती है। कबीर साहेब का मानना था कि ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग निष्काम सेवा, सत्य आचरण और निर्मल हृदय है।

     कबीर के दोहे आज भी जन-जन की जुबान पर हैं और जीवन को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने अपने विचारों से समाज में समानता, सद्भाव और सामाजिक एकता की मजबूत नींव रखी। वर्तमान समय में, जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब कबीर साहेब के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

    628वीं जयंती के अवसर पर समाज के वरिष्ठजनों ने सभी नागरिकों से संत कबीर के आदर्शों को अपनाकर सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द और मानव सेवा की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया है। उनका संदेश "मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है" आज भी समाज को एकता, शांति और सद्भाव के सूत्र में बांधने की प्रेरणा देता है।संत कबीर का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना छह शताब्दियों पूर्व था। उनकी वाणी केवल आध्यात्मिक चेतना ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण और मानवीय मूल्यों की अमूल्य विरासत है। 628वीं प्राकट्य जयंती समाज के लिए उनके आदर्शों को आत्मसात कर एक समरस, जागरूक और संस्कारित भारत के निर्माण का प्रेरणादायी अवसर है।

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