छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
कुरूद:- पंचायत का काम गांव का विकास करना है, न कि कथित दबाव बनाकर ग्रामीणों को परेशान करना। लेकिन कुरूद जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कातलबोड़ में सरपंच मिलन साहू की कार्यप्रणाली पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि संपत्ति कर, नल-जल कर, इस्टी लाइट शुल्क और अन्य करों की वसूली के लिए राशन वितरण को सरपंच की अनुमति और हस्ताक्षर से जोड़ा जा रहा है।
टैक्स वसूली के लिए राशन कार्ड बना दबाव का माध्यम?
ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत की ओर से लाउडस्पीकर के माध्यम से बार-बार ऐलान किया जा रहा है कि टैक्स जमा नहीं करने वालों को सरपंच की अनुमति के बिना राशन नहीं दिया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम में करीब 550 राशन कार्डधारी हैं, जिनमें लगभग 100 लोगों से टैक्स वसूली किए जाने की जानकारी मिली है। शासन द्वारा निर्धारित करीब 1,200 रुपये की राशि की वसूली के लिए कथित तौर पर राशन वितरण को माध्यम बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।सवाल यह है कि टैक्स वसूली के नाम पर गरीबों के राशन को प्रभावित करने का अधिकार आखिर किस नियम के तहत इस्तेमाल किया जा रहा है? यदि टैक्स बकाया है, तो नियमानुसार वसूली की कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन राशन वितरण को सरपंच की अनुमति से जोड़ने के आरोपों की जांच जरूरी है।
सेल्समैन भी नहीं दे पाए स्पष्ट जवाब
इस मामले में जब उचित मूल्य की दुकान के सेल्समैन से बातचीत की गई, तो वे ज्यादा कुछ स्पष्ट नहीं बता पाए। राशन वितरण के लिए सरपंच की अनुमति या हस्ताक्षर अनिवार्य होने के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस व्यवस्था के लिए कोई लिखित आदेश जारी किया गया है? यदि आदेश है, तो उसका वैधानिक आधार क्या है?
प्रशासन करे निष्पक्ष जांच
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या टैक्स वसूली के लिए राशन वितरण रोकने का कोई वैधानिक प्रावधान है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या अधिकारों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।अब सरपंच मिलन साहू को आरोपों पर जवाब देना चाहिए। ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में सरपंच का पक्ष सामने आना और प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण है। आखिर टैक्स वसूली के नाम पर राशन वितरण को लेकर विवाद क्यों खड़ा हो रहा है? इस सवाल का जवाब अब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।


