छत्तीसगढ़ कौशल न्यूज सत्यानारण पटेल भाटापारा : - साइकिल पा कर खिले चेहरे खेल में जीता पदक ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध। अनिवार्य रूप से जात...
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हमने निश्चित कर लिया है, नहीं मानेंगे प्रतिबंध का आदेश। बेखौफ बाजार आ और जा रहे हैं, मास्क के बगैर। नियमों को कदम-कदम पर तोड़ना, ना केवल सीख लिया है बल्कि अर्थदंड की सजा भी भुगतने के लिए तैयार हैं लेकिन तैयार नहीं हैं, उस नियम का पालन करने के लिए जो, हमारी और हमारे परिवार को मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है। धारा 144 के तहत 31 मार्च को जारी पांच महत्वपूर्ण नियम की जिस तरह अवहेलना की जा रही है, वह यह बताने के लिए काफी है कि हमने कोरोना का भय निकाल फेंका हैं।
बेखौफ यह गतिविधियां
स्कूलें बंद हैं लेकिन साईकिल वितरण जैसे काम खूब हो रहे हैं। इनमें जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी देखने में आ रही है। खेल स्पर्धाएं सामान्य दिनों की ही तरह चल रहीं हैं। ज्ञापन भी खूब सौंपे जा रहें हैं। ताजा फरमान, जाति प्रमाण पत्र बनाने का काम स्कूलों में होगा। पांच से अधिक की उपस्थिति पर कड़ा प्रतिबंध है लेकिन नहीं दिखाई देता सोशल डिस्टेंस। मास्क चेहरों पर हैं लेकिन नाक और मुंह के नीचे। ऐसे में, कैसे सुरक्षित रहे।
जिम्मेदार और जिम्मेदारी गायब :
कोविड-19 गाइडलाइन के तहत कई नियमों में से एक, धारा- 144 लगाने के आदेश जारी करने वालों ने मौन साध लेना सही मान लिया है क्योंकि हमने सुरक्षा उपायों से नजदीकी नहीं बल्कि दूरी बना ली है। कोरोना संक्रमण का भय अब नहीं सताता। तभी तो बाजार, दुकान और आयोजन में शामिल हो रहे हैं। घुल-मिल रहे हैं ऐसे लोगों से, जिनको घरों में ही रहने की हिदायत जारी की गई है।
इन्हें कौन समझाए :
सम्मान समारोह, पुरस्कार और साइकिल वितरण के अलावा ऐसे कई आयोजन, प्रतिकूल परिस्थितियों में भी खूब हो रहे हैं, जिनमें जनप्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। जाहिर है, जनप्रतिनिधि हैं तो, जन तो होंगे याने भीड़ होगी। ऐसे आयोजन में धारा- 144 को आहत होता हुआ देखा जा सकता है। क्या यह गतिविधियां संक्रमण को खुला निमंत्रण नहीं दे रही हैं? जैसे सवाल मत उठाइए क्योंकि जवाब नहीं मिलेंगे।


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