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“रोना चाहे रोना पाए” — बोड़रा के किसान चिरौंजी लाल साहू ने गीत के जरिए जताया दर्द, सरकार पर छलावे का आरोप

  छत्तीसगढ़ कौशल न्युज  धमतरी:- जिले के ग्राम बोड़रा (डाही) प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले धान खरीदी केंद्र पर बड़ी संख्...

 

छत्तीसगढ़ कौशल न्युज 

धमतरी:- जिले के ग्राम बोड़रा (डाही) प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले धान खरीदी केंद्र पर बड़ी संख्या में किसान परेशान हैं। शासन द्वारा 16 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक निर्धारित अवधि में धान खरीदी चली, लेकिन अंतिम तिथि तक भी लगभग 40 किसानों का टोकन नहीं कट सका, जिससे उनकी उपज नहीं बिक पाई। इसके बाद सरकार ने केवल दो दिन (5 और 6 फरवरी?) का विस्तार किया, लेकिन किसानों का आरोप है कि यह महज दिखावा है। टोकन जारी न होने से किसान भारी आर्थिक संकट में हैं।

        किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल टोकन जारी करने की मांग की। बोड़रा (डाही) के किसान चिरौंजी लाल साहू ने भावुक होकर कहा, "अब जाए तो जाए कहाँ..." और एक गाने के जरिए अपना दर्द बयां किया: "रोना चाहे रोना पाए..." उन्होंने इसे सरकार का छलावा बताया और उम्मीद जताई कि शासन उनकी सुनवाई करेगा। किसानों ने बताया कि कलेक्टर ने कहा - "हमारे हाथ में कुछ नहीं, हम आदेश का पालन कर रहे हैं।" वहीं सोसायटी अधिकारी ने जवाब दिया - "अगर हमारे हाथ में होता तो टोकन जारी कर देते।"

        यह समस्या धमतरी जिले के अन्य केंद्रों पर भी देखी जा रही है, जहां टोकन व्यवस्था और सीमित खरीदी लिमिट के कारण किसान धान लेकर लौट रहे हैं। प्रदेश में कुल धान खरीदी लक्ष्य के करीब पहुंचने के बावजूद, ग्रामीण इलाकों में ऐसी शिकायतें बढ़ रही हैं। किसान संगठन और विपक्षी दल समय सीमा बढ़ाने और टोकन प्रक्रिया सुधारने की मांग कर रहे हैं। किसानों की मांग: तत्काल टोकन जारी हो, बचे हुए धान की खरीदी सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी मेहनत बर्बाद न हो।इस अवसर पर रामकृष्ण साहू, हीरालाल साहू, भागवत यादव, रेखलाल साहू सहित कई किसान उपस्थित रहे। 

सरकार की ओर से कहा...था

        मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर राज्य सरकार ने किसानों को राहत देते हुए 5 और 6 फरवरी 2026 को धान खरीदी के लिए दो अतिरिक्त दिन दिए हैं। यह विस्तार तीन विशिष्ट श्रेणियों के किसानों के लिए है, जिनमें मुख्य रूप से वे शामिल हैं जिनका टोकन टेक्निकल कारणों, देरी या अन्य मुद्दों से नहीं कट सका था। यह फैसला किसानों के हित में लिया गया है, ताकि बचे हुए धान की खरीदी हो सके।

        प्रदेश स्तर पर धान खरीदी लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी है (कुछ जिलों में रिकॉर्ड खरीदी हुई, जैसे धमतरी में अच्छा प्रदर्शन), लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में टोकन और लॉजिस्टिक्स की शिकायतें बनी हुई हैं...किसान संगठन और विपक्षी दल (जैसे कांग्रेस) लंबे समय से समय सीमा बढ़ाने और टोकन प्रक्रिया सुधारने की मांग कर रहे थे, जिसमें धमतरी में चक्का जाम और प्रदर्शन भी हुए।

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