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सहकारी कर्मियों के लिए बजट शून्य, हजारों परिवार निराश – प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र कुमार साहू

छत्तीसगढ़ कौशल न्युज  रायपुर:- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा फरवरी 2026 के बजट सत्र में वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत बजट में सहकारी स...


छत्तीसगढ़ कौशल न्युज 

रायपुर:- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा फरवरी 2026 के बजट सत्र में वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत बजट में सहकारी समिति कर्मचारियों के लिए किसी भी प्रकार का प्रावधान नहीं किए जाने पर गहरी निराशा व्यक्त की गई है। छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ रायपुर एवं छत्तीसगढ़ धान खरीदी ऑपरेटर संघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र कुमार साहू ने कहा कि बजट में किसानों एवं अन्य विभागों के लिए कई घोषणाएं की गईं, लेकिन सहकारी कर्मियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

    प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि सहकारी समिति के कर्मचारी पिछले 40-50 वर्षों से गांव, गरीब और किसानों की सेवा बस्तर से रायपुर तक अल्प वेतन में करते आ रहे हैं। उन्हें इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन निराशा हाथ लगी। उन्होंने कहा कि महासंघ द्वारा लंबित चार सूत्रीय जायज मांगों को लेकर 19 दिनों तक आंदोलन किया गया था। शासन-प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारी काम पर लौटे और सफलतापूर्वक धान खरीदी का कार्य संपन्न कराया।उन्होंने याद दिलाया कि गत वर्ष भी 12 दिनों तक आंदोलन चला था, जिसके बाद मांगों के समाधान हेतु अंतरविभागीय कमेटी का गठन किया गया था। साथ ही धान सुखाने (सुखत) के खर्च के संबंध में खाद्य विभाग द्वारा लिखित पत्र भी जारी किया गया था। इस वर्ष भी अंतरविभागीय समिति की बैठक संपन्न हुई और प्रदेश की समितियों से जानकारी मंगाई गई। धान का समय पर उठाव नहीं होने के कारण अतिरिक्त खर्च देने के आदेश भी पूर्व में जारी किए गए थे।

     प्रदेशाध्यक्ष साहू ने कहा कि प्रदेश की हजारों समितियों और कर्मचारियों को उम्मीद थी कि मध्यप्रदेश सरकार की तर्ज पर प्रबंधकीय अनुदान के रूप में प्रति समिति तीन-तीन लाख रुपये का प्रावधान किया जाएगा तथा धान सुखत की राशि भी बजट में शामिल की जाएगी। किंतु ऐसा नहीं होने से हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों को गहरी निराशा हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में समितियों से समय पर धान उठाव नहीं होने के कारण समितियां लगातार घाटे में जा रही हैं और धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर पहुंच रही हैं। यदि शीघ्र ही राज्य सरकार द्वारा धान उठाव के संबंध में सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो समितियों की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

         प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि एक ओर माननीय प्रधानमंत्री द्वारा सहकारिता मंत्रालय का गठन कर “सहकार से समृद्धि” के तहत विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं और प्रत्येक पंचायत में पैक्स (PACS) गठन की प्रक्रिया जारी है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में समितियां आर्थिक रूप से कमजोर होती जा रही हैं। ऐसे में राज्य सरकार को सहकारी कर्मियों और समितियों के हित में ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता है।

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