छत्तीसगढ़ कौशल न्युज नई दिल्ली:- चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच अब गुड़ भी आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ रहा है। कुछ दिन पहले 40 से 50 रुपय...
छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
नई दिल्ली:- चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच अब गुड़ भी आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ रहा है। कुछ दिन पहले 40 से 50 रुपये किलो बिकने वाला गुड़ कई बाजारों में अब 75 से 90 रुपये किलो तक पहुंच गया है।उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पिछले एक महीने में गुड़ के दाम में 40 से 60 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई ।भारत दुनिया का सबसे बड़ा गुड़ उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी बताई जाती है। देश में पैदा होने वाले गन्ने का लगभग 20 से 30 फीसदी हिस्सा गुड़ और खांडसारी बनाने में इस्तेमाल होता है। इससे करीब 25 लाख किसान, मजदूर और छोटे ग्रामीण कारोबारी जुड़े हुए हैं।
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में गुड़ का भाव करीब 15 दिनों में 70 से बढ़कर 90 रुपये किलो हो गया है। मेरठ और मुरादाबाद में कीमत 80 रुपये किलो तक पहुंच गई है।कानपुर में भी भाव 60 से बढ़कर 80 रुपये किलो हो गया है। नोएडा और गाजियाबाद में गुड़ 70 से 80 रुपये किलो के बीच बिक रहा है। लखीमपुर खीरी में 50-55 रुपये वाला गुड़ अब 75-80 रुपये किलो तक पहुंच गया है।मध्य प्रदेश की प्रमुख मंडियों में गुड़ का थोक भाव करीब 71-72 रुपये किलो बताया जा रहा है, जबकि खुदरा बाजार में सामान्य गुड़ लगभग 80 रुपये किलो बिक रहा है। ऑर्गेनिक गुड़ के दाम भी बढ़कर करीब 150 रुपये किलो हो गए हैं।
पुराने स्टॉक की कमी से बढ़ी कीमत कारोबारियों के मुताबिक पुराने पेराई सीजन का स्टॉक अब खत्म होने की स्थिति में है। नए गन्ने की पेराई और गुड़ बनाने वाले कोल्हू अक्टूबर-नवंबर में पूरी क्षमता से शुरू होंगे। सर्दियों में गुड़ की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए कारोबारी अभी से स्टॉक जुटा रहे हैं।इस बार गन्ने के उत्पादन में कमी का असर भी गुड़ के उत्पादन पर पड़ा है। कई कोल्हू कम समय तक चले, जिससे बाजार में उपलब्धता प्रभावित हुई। वहीं चीनी के महंगे होने से गुड़ की मांग बढ़ी है। खाद्य पदार्थों में चीनी के विकल्प के रूप में गुड़ के इस्तेमाल का चलन भी इसकी खपत बढ़ा रहा है।
निर्यात में भी लगातार बढ़ोतरी
भारतीय गुड़ की विदेशों में मांग भी लगातार बढ़ रही है। 2015-16 में भारत ने 292.8 मीट्रिक टन गुड़ और पारंपरिक गुड़ उत्पादों का निर्यात किया था, जिसका मूल्य करीब 197 मिलियन डॉलर था। 2024-25 में निर्यात बढ़कर 471.9 मीट्रिक टन और मूल्य 406.8 मिलियन डॉलर हो गया। अमेरिका, UAE, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और नेपाल भारतीय गुड़ के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं।भारत के कई पारंपरिक गुड़ उत्पादों को GI टैग भी मिला है। इनमें महाराष्ट्र का कोल्हापुरी गुड़, उत्तर प्रदेश का मुजफ्फरनगर गुड़, केरल का मरयूर गुड़ और सेंट्रल त्रावणकोर गुड़ प्रमुख हैं।गुड़ को अनरिफाइंड स्वीटनर माना जाता है और इसमें गन्ने के रस से जुड़े कुछ खनिज व सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद रहते हैं। हालांकि, गुड़ भी चीनी की तरह मीठा खाद्य पदार्थ है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना जरूरी है।


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