छत्तीसगढ़ कौशल न्युज रायपुर:- देश में चीनी की कीमतों और आयात नीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सरकार की नीतियों के चलते भारत महज ए...
छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
रायपुर:- देश में चीनी की कीमतों और आयात नीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सरकार की नीतियों के चलते भारत महज एक महीने के भीतर चीनी निर्यातक देश से आयातक देश की स्थिति में पहुंच गया है। इसे लेकर सरकार की नीति और आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।बताया जा रहा है कि भारत करीब 10 लाख मीट्रिक टन चीनी का आयात करने जा रहा है। दावा है कि यह आयात ड्यूटी-फ्री होने के कारण सरकार को करीब 4,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इन आंकड़ों और आयात नीति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित सरकारी स्रोतों से किया जाना आवश्यक है।
वहीं, राजधानी रायपुर में शक्कर की खुदरा कीमत 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। बढ़ती कीमतों के कारण आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।भारत इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात, अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, जिबूती और सोमालिया जैसे देशों को चीनी का निर्यात करता रहा है। ऐसे में आयात की स्थिति बनने को लेकर नीति नियोजन और बाजार प्रबंधन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि यदि देश में चीनी का पर्याप्त उत्पादन और उपलब्धता थी, तो आयात की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसका असर आम जनता की जेब पर क्यों पड़ रहा है। वहीं सरकार की ओर से चीनी आयात के कारण, मात्रा, शुल्क व्यवस्था और कीमतों पर प्रभाव को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीतिगत फैसलों का असर आम उपभोक्ता पर कब तक पड़ेगा और चीनी बाजार को स्थिर करने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी?


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