छत्तीसगढ़ कौशल न्युज रायपुर:- आरजेएस एवं पीबीएच पॉजिटिव मीडिया, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में “...
छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
रायपुर:- आरजेएस एवं पीबीएच पॉजिटिव मीडिया, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में “भारतीय वीरांगनाएं : क्रांति की चिंगारी और स्वतंत्रता का उदय” विषय पर अंतरराष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में ग्रेसियस कॉलेज ऑफ एजुकेशन, अभनपुर, रायपुर की एसोसिएट प्रोफेसर, साहित्यकार एवं कवयित्री डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक ने अपने विचार व्यक्त किए।डॉ. मुक्ता कौशिक ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल पुरुषों के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह असंख्य वीरांगनाओं के त्याग, साहस, शौर्य और बलिदान की अमर गाथा भी है। इन वीरांगनाओं ने हाथों में तलवार उठाकर विदेशी सत्ता को चुनौती दी और यह सिद्ध किया कि भारत की नारी अबला नहीं, बल्कि राष्ट्रशक्ति है।उन्होंने कहा कि जब अंग्रेजी शासन भारत में अपना साम्राज्य मजबूत कर रहा था, तब अनेक वीरांगनाओं ने अपने भीतर क्रांति की ऐसी चिंगारी प्रज्वलित की, जिसने आगे चलकर स्वतंत्रता की ज्वाला का रूप लिया। 1857 की क्रांति में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उनके अदम्य साहस और राष्ट्रप्रेम ने देशवासियों को प्रेरणा दी।
डॉ. कौशिक ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में सरोजिनी नायडू, रानी दुर्गावती, भीकाजी कामा, अरुणा आसफ अली, उषा मेहता, कस्तूरबा गांधी सहित असंख्य महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसी ने सत्याग्रह किया, किसी ने जेल यातनाएं सहीं, तो किसी ने भूमिगत आंदोलन का संचालन किया और राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दिया।उन्होंने कहा कि इन वीरांगनाओं की सबसे बड़ी शक्ति राष्ट्रप्रेम था। उनकी वीरता की चिंगारी धीरे-धीरे पूरे भारत में फैलती गई। गांव से शहरों तक और महलों से झोपड़ियों तक महिलाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
डॉ. मुक्ता कौशिक ने आह्वान किया कि आज हम संकल्प लें कि उन वीरांगनाओं की तरह अपने राष्ट्र के प्रति ईमानदार रहेंगे और भारत को ज्ञान, संस्कार एवं प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ाने में अपना योगदान देंगे।इस अवसर पर उन्होंने अपनी पंक्तियों के माध्यम से वीरांगनाओं को नमन करते हुए कहा—
“जिन वीरांगनाओं ने मातृभूमि पर अपना सर्वश्रेष्ठ लुटाया,
उनके बलिदानों ने स्वतंत्रता का दीप जलाया।
उनकी शौर्यगाथा युगों-युगों तक हमें राह दिखाएगी,
भारत की हर बेटी उनके साहस की कहानी दोहराएगी।”
डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक एसोसिएट प्रोफेसर के साथ ही साहित्यकार एवं कवयित्री हैं। उन्हें अनेक अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।अंतरराष्ट्रीय वेबिनार के आयोजक उदय कुमार मन्ना, एडिटर-इन-चीफ, नई दिल्ली रहे। कार्यक्रम में वक्ता डॉ. रश्मि चौबे, गाजियाबाद, स्वीटी पाल, नई दिल्ली सहित अनेक विद्वानों की सहभागिता रही। कार्यक्रम के अंत में नीति अरोड़ा, नई दिल्ली ने आभार व्यक्त किया।


No comments