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ACB"की दस्तक..तो तहसील के राज जागे...सालों से जमे बाबू सवालों के घेरे में भागे,..कुर्सी का मोह या सिस्टम की मेहरबानी

  छत्तीसगढ़ कौशल न्युज  धमतरी: - कुरूद एसडीएम कार्यालय में एसीबी की कार्रवाई के बाद अब जिले के एक ............तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाल...

 

छत्तीसगढ़ कौशल न्युज 

धमतरी:- कुरूद एसडीएम कार्यालय में एसीबी की कार्रवाई के बाद अब जिले के एक ............तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। यहां वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ बाबुओं को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर शिकायतें करते हुए जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।शिकायत के मुताबिक, एक बाबू करीब 10 वर्षों से, जबकि दूसरा करीब 4 वर्षों से उसी तहसील कार्यालय में पदस्थ है। लंबे समय से एक ही कार्यालय में पदस्थापना को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण की समीक्षा किस आधार पर की जाती है?

10साल से एक ही कुर्सी, आखिर क्यों?

          ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय तक एक ही कार्यालय में पदस्थ रहने से कर्मचारियों की स्थानीय स्तर पर पकड़ मजबूत हो सकती है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि तहसील कार्यालय में अपने काम के लिए आने वाले लोगों को कथित रूप से बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। वहीं कुछ मामलों में काम कराने के एवज में कथित राशि मांगने की शिकायत भी सामने आने की बात कही गई है। यदि शिकायतें निराधार हैं तो प्रशासनिक जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है। लेकिन सवाल यह है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने में आखिर देरी क्यों?

ACB कार्रवाई के बाद उठे सवाल

       कुरूद एसडीएम कार्यालय में हाल ही में हुई एसीबी कार्रवाई के बाद राजस्व कार्यालयों की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की पदस्थापना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में दूसरे तहसील कार्यालय से सामने आई शिकायत ने जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व विभाग से जुड़े कार्यालयों में लंबे समय से पदस्थ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को रोका जा सके।

बाबुओं की कुर्सी नहीं बदलती या व्यवस्था की नजर नहीं पड़ती?

               शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन के सामने कई सवाल उठाए हैं....एक कर्मचारी करीब एक दशक तक एक ही तहसील कार्यालय में कैसे पदस्थ रह सकता है? क्या उसकी पदस्थापना अवधि की समीक्षा हुई? क्या स्थानांतरण नियमों के तहत उसका रिकॉर्ड जांचा गया? क्या उसके खिलाफ पूर्व में कोई शिकायत मिली थी? यदि शिकायत मिली थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई?इन सवालों का जवाब संबंधित कर्मचारियों के पदस्थापना आदेश, स्थानांतरण रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।

शिकायत दबेगी या खुलेगा पूरा रिकॉर्ड?

           ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित तहसील कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों के पदस्थापना आदेश, स्थानांतरण रिकॉर्ड, कार्य आवंटन, पूर्व शिकायतों तथा कथित लेन-देन से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन शिकायत लेकर सिर्फ फाइल बंद करेगा, या वर्षों से एक ही जगह जमे बाबुओं का पूरा रिकॉर्ड खंगालकर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखेगा? जांच होने पर ही शिकायतों की सच्चाई और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

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