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कुरुद की ऐतिहासिक धरोहर ‘शासकीय बालक स्कूल’ अब बना आधुनिक ‘मॉडल स्कूल’

  छत्तीसगढ़ कौशल न्युज  कुरुद: - नगर के हृदय स्थल पर स्थित ऐतिहासिक शासकीय बालक उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुरुद आज अपनी गौरवशाली परंपरा और आधु...

 

छत्तीसगढ़ कौशल न्युज 

कुरुद:- नगर के हृदय स्थल पर स्थित ऐतिहासिक शासकीय बालक उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुरुद आज अपनी गौरवशाली परंपरा और आधुनिक सुविधाओं के अनूठे संगम के रूप में उभरकर सामने आया है। वर्ष 1956 से शिक्षा की अलख जगा रहा यह विद्यालय अपनी स्वर्ण जयंती पूर्ण कर अब हीरक जयंती (Diamond Jubilee) की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। कुरुद का यह विद्यालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सामाजिक और शैक्षणिक क्रांति का साक्षी है। पिछले 70 वर्षों में यहाँ के गलियारों से निकलकर आसपास के 50 से अधिक गांवों के विद्यार्थियों ने सफलता की नई इबारत लिखी है। आज जब हम इस विद्यालय को आधुनिक लैब और अटल टिंकरिंग लैब से लैस देखते हैं, तो यह उन हजारों पूर्व छात्रों के लिए भी गर्व का विषय है जो आज देश के उच्च पदों पर बैठकर इस शाला का नाम रोशन कर रहे हैं। यह 'मॉडल स्कूल' अब ग्रामीण प्रतिभाओं को वैश्विक मंच प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।वर्तमान में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के रूप में संचालित इस संस्थान को इसके ऐतिहासिक महत्व और उत्कृष्ट शैक्षणिक रिकॉर्ड के कारण केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पी.एम. श्री' (PM SHRI) योजना के तहत चुना गया है।

करोड़ों की लागत से बदली अधोसंरचना...

पिछले कुछ वर्षों में विद्यालय के स्वरूप में क्रांतिकारी परिवर्तन आया हैं। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा आत्मानंद स्कूल योजना के तहत विद्यालय की अधोसंरचना (Infrastructure) को नया रूप देने के लिए करोड़ों रुपये का निवेश किया गया। भव्य भवन, सुसज्जित कक्षाएं और व्यवस्थित परिसर ने इसे निजी स्कूलों से भी बेहतर स्वरूप प्रदान किया है।अटल टिंकरिंग लैब और कला कक्ष: नई सोच को उड़ान...पी.एम. श्री स्कूल योजना के तहत विद्यालय में अब अटल टिंकरिंग लैब (ATL), अत्याधुनिक भौतिकी प्रयोगशाला और कला एवं सांस्कृतिक कक्ष पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं।नगर के हृदय स्थल पर स्थित होने के कारण इस शाला के विकास को पूरा कुरुद अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि मान रहा है। नगरवासियों का कहना है कि जिस स्कूल से पढ़कर पुरानी पीढ़ी आज ऊंचे पदों पर है, उसी स्कूल को अब 2026 की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस देखकर मन गौरवान्वित होता है। यह विद्यालय अब केवल शिक्षा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को 'पंख' देने वाला लॉन्चपैड बन गया है।

"1956 की विरासत और 2026 की तकनीक का यह मिलन कुरुद के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। हमारे बच्चों के पास अब वही सुविधाएं हैं जो महानगरों के बड़े निजी स्कूलों के पास होती हैं।"

नगर की पहचान, भविष्य की कमान

नगर के बीचों-बीच स्थित यह विद्यालय कुरुद की धड़कन है। स्थानीय नागरिकों और शिक्षाविदों का कहना है कि प्रशासन और सरकार के साझा प्रयासों ने इसे एक 'मॉडल स्कूल' बना दिया है। यहाँ के विद्यार्थी अब केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे तकनीकी, सांस्कृतिक और व्यावहारिक रूप से इतने सक्षम होंगे कि वैश्विक मंच पर चुनौतियों का सामना कर सकें। करोड़ों रुपये के निवेश से स्कूल की अधोसंरचना को जो नया स्वरूप मिला, वह किसी भी बड़े कॉर्पोरेट स्कूल को टक्कर देता है। भव्य प्रवेश द्वार, हवादार सुसज्जित कक्षाएं, और व्यवस्थित खेल परिसर ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था के प्रति आम जन का नजरिया बदल दिया है।

 अटल टिंकरिंग लैब: यहाँ विद्यार्थी किताबी ज्ञान से इतर रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवाचार (Innovation) के गुर सीख सकेंगे।

  कला एवं सांस्कृतिक कक्ष: यह कक्ष विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने का केंद्र बनेगा।

  आधुनिक लैब: उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित लैब छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान में दक्ष बनाएगी।

नगर का गौरव और भविष्य की राह...नगर के बीचों-बीच स्थित होने के कारण यह स्कूल हमेशा से कुरुद की पहचान रहा है। स्थानीय नागरिकों और शिक्षाविदों का मानना है कि बुनियादी ढांचे में हुए इस सुधार और नई सुविधाओं के जुड़ने से यह विद्यालय क्षेत्र के लिए एक 'मॉडल स्कूल' बन गया है। यहाँ से निकलने वाले विद्यार्थी न केवल शैक्षणिक रूप से सशक्त होंगे, बल्कि तकनीकी और सांस्कृतिक रूप से भी भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहेंगे

विरासत और विकास: 50 गांवों की उम्मीदों का केंद्र

यह विद्यालय कुरुद नगर ही नहीं, बल्कि आसपास के 50 से अधिक गांवों के लिए सामाजिक और शैक्षणिक क्रांति का उद्गम स्थल रहा है। अपनी स्वर्ण जयंती पार कर हीरक जयंती (Diamond Jubilee) की ओर अग्रसर इस स्कूल के गलियारों ने उन प्रतिभाओं को गढ़ा है, जो आज देश-विदेश के उच्च पदों पर आसीन होकर कुरुद का गौरव बढ़ा रहे हैं। पुराने छात्रों के लिए जहाँ यह विद्यालय यादों का झरोखा है, वहीं नई पीढ़ी के लिए यह आधुनिकता की पहली सीढ़ी बन गया है।"1956से शुरू हुआ यह सफर आज आधुनिकता के शिखर पर है। पी.एम. श्री और आत्मानंद सुविधाओं के जुड़ जाने से कुरुद के बच्चों को अब विश्वस्तरीय शिक्षा अपने ही नगर में प्राप्त हो रही है।

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