छत्तीसगढ़ कौशल न्युज भिलाई :- इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग (आईआईआईई) के 69वें स्थापना दिवस के अवसर पर भिलाई चेप्टर के तत्...
भिलाई:- इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग (आईआईआईई) के 69वें स्थापना दिवस के अवसर पर भिलाई चेप्टर के तत्वावधान में “सस्टेनेबिलिटी और ग्रीन इंजीनियरिंग में इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग प्रोफेशनल्स की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भिलाई इस्पात संयंत्र के पूर्व सीईओ वी. के. अरोरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता वाइस चेयरमैन घनश्याम कुमार देवांगन ने की।संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व सीईओ वी. के. अरोरा ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी और ग्रीन इंजीनियरिंग को व्यवहार में उतारने में इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग प्रोफेशनल्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आईआईआईई भिलाई चेप्टर की सक्रियता एवं रचनात्मक गतिविधियों की सराहना की। आधार वक्तव्य में वाइस चेयरमैन घनश्याम कुमार देवांगन ने कहा कि ग्रीन इंजीनियरिंग केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट में कमी, संसाधनों का इष्टतम उपयोग, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा सतत विकास की समग्र अवधारणा शामिल है। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की तकनीकें जैसे टाइम एवं मोशन स्टडी, एर्गोनॉमिक्स, फाइव एस, सिक्स सिग्मा, वैल्यू इंजीनियरिंग, वेस्ट एलिमिनेशन, प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन, रिसाइक्लिंग, लाइन बैलेंसिंग और डेटा आधारित निर्णय सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रभावी सिद्ध हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग प्रोफेशनल्स उद्योगों, नगर निकायों, सेवा क्षेत्रों तथा सामाजिक विकास परियोजनाओं में ग्रीन एनर्जी प्रैक्टिसेस को लागू कर आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही युवाओं एवं प्रोफेशनल्स से अपने कार्यक्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।संगोष्ठी के दौरान केस स्टडी एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से बताया गया कि इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग टूल्स के उपयोग से ऊर्जा की बचत, लागत में कमी तथा पर्यावरणीय दुष्प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है। आई.ई. तकनीकों का उपयोग महिला स्व-सहायता समूहों, कुटीर एवं लघु उद्योगों तथा कृषि क्षेत्र में करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के अधिकतम उपयोग पर बल दिया गया, ताकि भावी पीढ़ी के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।संगोष्ठी में वरिष्ठ इंजीनियर के.के. गुप्ता, प्रदीप कुमार तिवारी, सत्यनाथ साहूकार, सुशील कुमार हरिरमानी सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ प्रोफेशनल्स को ग्रीन एवं सस्टेनेबल एनर्जी समाधान अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी, जिससे समाज और उद्योग दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम का संचालन ऑनरेरी सेक्रेटरी अवनीश दुबे ने किया तथा आभार प्रदर्शन ट्रेजरर विवेक गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि वी. के. अरोरा को उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में भिलाई इस्पात संयंत्र एवं अन्य उद्योगों के वरिष्ठ इंजीनियर एवं प्रोफेशनल्स डॉ. कांतीलाल विश्वकर्मा, एस.के. डोगरा, के.के. गुप्ता, जे.सी. रे, बी.के. सराफ, संतोष अग्रवाल, आर.एल. ढीढी, मोहम्मद आरिफ खान, एन. नागेश्वर राव, देवेंद्र पाल सिंह ब्रार सहित बड़ी संख्या में इंजीनियर सदस्य एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।


No comments