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अख़बार में लिपटा निवाला, सख़्ती भी काग़ज़ी कमाल —कार्रवाई ग़ायब पूरी, मौन प्रशासन पर बड़े सवाल...?

छत्तीसगढ़ कौशल न्युज  धमतरी: जिले में खाद्य पदार्थों को अखबारी कागज एवं प्रिंटेड पेपर में पैक कर बेचने को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इसे...


छत्तीसगढ़ कौशल न्युज 

धमतरी: जिले में खाद्य पदार्थों को अखबारी कागज एवं प्रिंटेड पेपर में पैक कर बेचने को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इसे मानव स्वास्थ्य के लिए “घातक” बताया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि जब स्वयं विभाग इसे खतरनाक मान रहा है, तो अब तक कितने दुकानदारों पर कार्रवाई की गई? इस पर विभाग मौन नजर आ रहा है।शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्ट्रीट फूड, मिठाई, नमकीन और अन्य खाद्य सामग्री खुलेआम अखबार में लपेटकर दी जा रही है। कम लागत के कारण दुकानदार इस तरीके को अपनाते हैं। विभाग द्वारा इसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बताया गया है, लेकिन इसके बावजूद न तो व्यापक जांच अभियान चलाया गया और न ही किसी पर दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की गई है।

         खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुसार अखबारी कागज और प्रिंटेड पेपर की स्याही में डाई आइसोब्यूटाइल फ्थेलेट, डाइ-एन-आइसोब्यूटाइलेट जैसे हानिकारक रसायन पाए जाते हैं। ये रसायन विशेषकर तेलीय खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने पर भोजन में मिल जाते हैं और शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे पाचन तंत्र संबंधी विकार, विषाक्तता, विभिन्न प्रकार के कैंसर, महत्वपूर्ण अंगों की विफलता तथा प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है।इतने गंभीर दुष्प्रभावों की चेतावनी के बावजूद जिले में अब तक कितने प्रतिष्ठानों की जांच हुई, कितनों को नोटिस जारी हुआ या कितनों पर जुर्माना लगाया गया—इस पर विभाग स्पष्ट जानकारी देने से बचता नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल सलाह जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है, जबकि धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

             खाद्य सुरक्षा अधिकारी फनेश्वर पिथौरा (खाद्य एवं औषधि प्रशासन, जिला धमतरी) से इस संबंध में जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 87706 01262 पर संपर्क करने का अनुरोध किया गया है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।इधर, शिकायत के लिए जारी टोल फ्री नंबर भी औपचारिकता बनकर रह गया है। कई नागरिकों का कहना है कि शिकायत करने पर फोन रिसीव नहीं होता या कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं मिलती। इससे यह सवाल उठता है कि आम जनता की सुरक्षा को लेकर विभाग कितनी गंभीरता से कार्य कर रहा है।विभाग द्वारा मानक एवं स्वीकृत खाद्य पैकेजिंग सामग्री के उपयोग की सलाह दी गई है और नियमों के उल्लंघन की सूचना देने की अपील भी की गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी का मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किया गया है। लेकिन जब तक ठोस जांच, नियमित निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह सख्ती केवल कागजों तक सीमित रहने का खतरा बना रहेगा।अब देखना यह है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन चेतावनी से आगे बढ़कर वास्तविक कार्रवाई कब करता है, ताकि जनता के स्वास्थ्य से हो रहे इस संभावित खिलवाड़ पर प्रभावी रोक लग सके।

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