छत्तीसगढ़ कौशल न्युज कुरूद:- ग्राम मौरीकला (गुफा) की पावन तपोभूमि एक बार फिर भक्ति, आस्था और वैदिक परंपरा के संगम का साक्षी बनने जा रही है।...
छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
कुरूद:- ग्राम मौरीकला (गुफा) की पावन तपोभूमि एक बार फिर भक्ति, आस्था और वैदिक परंपरा के संगम का साक्षी बनने जा रही है। यहां आगामी 02 अप्रैल से 06 अप्रैल 2026 तक 5 दिवसीय श्रीमद् लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। महायज्ञ के दौरान पूरा क्षेत्र वेदमंत्रों की पवित्र ध्वनि से गुंजायमान रहेगा। मौरीकला की यह भूमि संत-महात्माओं की साधना और तपस्या के लिए विख्यात रही है। श्रद्धालुओं के अनुसार यहां आज भी श्री श्री 108 श्री शिवबोधानंद स्वामी जी महाराज का दिव्य तेज और आध्यात्मिक प्रभाव महसूस किया जा सकता है, जिससे यहां आने वाले लोगों को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
ग्राम में धार्मिक आयोजनों की गौरवशाली परंपरा रही है। वर्ष 1980-85 से 2008 तक श्री श्री 108 श्री सगुणानंद स्वामी जी महाराज के सानिध्य में लगातार 9 दिवसीय भव्य यज्ञों का आयोजन होता रहा, जिसमें चंडी यज्ञ, शिव यज्ञ एवं विष्णु-लक्ष्मी यज्ञ प्रमुख रहे। इन आयोजनों के दौरान रामधुनी, रामायण पाठ, झांकियां, जसगीत और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता था, जिससे पूरा गांव मड़ाई मेले जैसा प्रतीत होता था। इन यज्ञों की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी, जिसके चलते काशी सहित विभिन्न स्थानों से साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते थे। उस समय लोग बैलगाड़ियों में भजन-कीर्तन करते हुए इस तपोभूमि तक पहुंचते थे, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता था।
वर्ष 2016-17 में यहां आयोजित 108 कुंडीय महायज्ञ भी इस स्थल के इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, जो माँ तारिणी शक्तिपीठ गुरुजीभांठा के महंत स्वामी श्री उमेशानंद गिरी जी के सानिध्य में संपन्न हुआ था। इस आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक चेतना को नई दिशा दी। तपोभूमि परिसर में स्थित प्राचीन गुफा और कुआं इस स्थल की विशेष पहचान हैं, जिनसे जुड़े आध्यात्मिक और रहस्यमयी पहलुओं के कारण श्रद्धालुओं में विशेष आस्था बनी हुई है। मान्यता है कि इन स्थानों पर संतों ने वर्षों तक तपस्या की, जिससे यहां आज भी दिव्य ऊर्जा का संचार होता है।आयोजन समिति ने क्षेत्र सहित दूर-दराज के श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सपरिवार उपस्थित होकर इस महायज्ञ में सहभागिता करें और धर्मलाभ प्राप्त


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