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धान संग्रहण केंद्र में 20-25 लाख रुपये गबन का आरोप, पर मलाई सबमें बंटी?

छत्तीसगढ़ कौशल न्युज .......:- छत्तीसगढ़ के धान संग्रहण केंद्रों में अनियमितताओं का सिलसिला जारी है। कुछ महीने पहले कवर्धा जिले में 7 करोड़...


छत्तीसगढ़ कौशल न्युज

.......:- छत्तीसगढ़ के धान संग्रहण केंद्रों में अनियमितताओं का सिलसिला जारी है। कुछ महीने पहले कवर्धा जिले में 7 करोड़ रुपये के धान को “चूहे और दीमक खा गए” वाले बयान से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। अब अपने जिले के एक धान संग्रहण केंद्र पर फिर भारी गबन का मामला सामने आया है। स्थानीय सूत्रों और प्रभावित कर्मचारियों के अनुसार, जिले के एक प्रमुख धान संग्रहण केंद्र पर डेली वेज कर्मचारियों की चापलूस (साहू) की निगरानी में 20 से 25 लाख रुपये की नगद लेन-देन का गंभीर आरोप लगा है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र से मात्र 5-6 किलोमीटर दूर स्थित राइस मिलो के साथ हाथों-हाथ मिलाकर डील हुई। धान को जानबूझकर सड़ा हुआ दिखाकर भुगतान में हेराफेरी की गई और लाखों रुपये गबन कर लिए गए।

मिली-भगत का आरोप

प्रभावितों का आरोप है कि डेली वेज कर्मचारियों की चापलूस (साहू) की कुछ ड्रॉइवर, हेमाल से लेकर कर्मचारियों के साथ मिलीभगत से यह पूरा लेन-देन अंजाम दिया गया। राइस मिलर से नगद राशि ली गई, लेकिन उच्च अधिकारियों को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई। आरोप है कि “मलाई सबमें बंटी” है—ड्रॉइवर, हेमाल से लेकर हाथी तक सभी को अपनी हिस्सेदारी मिली।

पुराने कर्मचारियों को हटाकर रिश्तेदारों को नौकरी

इस मामले में और भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रभारी साहू पर 12-15 वर्षों से कार्यरत स्थानीय अर्धकुशल श्रमिकों को हटाकर अपने नजदीकी परिचितों, मित्रों और परिजनों (भाई, बेटा, भतीजे आदि) को काम पर रखने का आरोप लगाया जा रहा है। बाहर से नए लोगों को लाकर पुराने कर्मचारियों की जगह दी गई, जिससे केंद्र पर कार्यरत पुराने श्रमिकों में भारी नाराजगी देखी गई। 

   इस मामले पर जब हमारे संवाददाता ने डेली कर्मचारी की चापलूसी (साहू) से बात की तो उन्होंने सभी आरोपों से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “ये निराधार और बुनियाद रहित आरोप हैं।”

प्रशासन की भूमिका

     यह मामला जिले के धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।अधिक जानकारी और आधिकारिक जांच की प्रतीक्षा है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह छत्तीसगढ़ में धान संग्रहण व्यवस्था में गहरी सड़न को उजागर करेगा।

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