छत्तीसगढ़ कौशल न्युज रायपुर:- वर्तमान युग विज्ञान और तकनीक का युग है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) मानव जीवन के ह...
छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
रायपुर:- वर्तमान युग विज्ञान और तकनीक का युग है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) मानव जीवन के हर क्षेत्र में तेजी से अपना प्रभाव स्थापित कर रही है। शिक्षा का क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा है। AI ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक सरल, प्रभावशाली और आधुनिक बना दिया है। विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन, त्वरित उत्तर और डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने में AI महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से मशीनें मनुष्य की तरह सोचने, समझने और निर्णय लेने का कार्य करती हैं। मोबाइल, कंप्यूटर, ऑनलाइन शिक्षा मंच, चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट इसके प्रमुख उदाहरण हैं।उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से विद्यार्थियों को उनकी क्षमता, रुचि और सीखने की गति के अनुसार अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इससे व्यक्तिगत शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है। कमजोर छात्रों को अतिरिक्त सहायता तथा प्रतिभाशाली छात्रों को उन्नत अध्ययन सामग्री आसानी से उपलब्ध हो रही है। ऑनलाइन शिक्षा के विकास में भी AI की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। AI आधारित एप्स और वेबसाइटों ने शिक्षा को घर-घर तक पहुँचाया है। विद्यार्थी कहीं भी और कभी भी अध्ययन कर सकते हैं। कोविड महामारी के दौरान AI आधारित ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली ने शिक्षा को निरंतर बनाए रखने में अहम योगदान दिया।
AI शिक्षकों के कार्यों को भी आसान बना रही है। मूल्यांकन, प्रश्नपत्र निर्माण, उपस्थिति और पाठ योजना जैसे कार्यों में AI की सहायता से समय की बचत हो रही है, जिससे शिक्षक विद्यार्थियों पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं। साथ ही AI चैटबॉट और वर्चुअल असिस्टेंट विद्यार्थियों के प्रश्नों का तुरंत समाधान देकर उनके आत्मविश्वास को बढ़ा रहे हैं।
डॉ. कौशिक ने कहा कि AI विद्यार्थियों में तकनीकी ज्ञान समस्या समाधान क्षमता, रचनात्मकता और डिजिटल कौशल का विकास कर रही है, जो भविष्य के रोजगार के लिए आवश्यक हैं।हालाँकि उन्होंने AI के कुछ नकारात्मक प्रभावों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। अत्यधिक तकनीकी निर्भरता के कारण विद्यार्थियों में सामाजिकता, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं में कमी आने की आशंका रहती है। साथ ही यदि विद्यार्थी हर कार्य के लिए AI पर निर्भर हो जाएँ, तो उनकी स्वाध्याय और चिंतन क्षमता कमजोर हो सकती है।उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के पास आधुनिक तकनीकी सुविधाओं की कमी होने से डिजिटल असमानता भी बढ़ सकती है। वहीं AI के कारण पारंपरिक शिक्षण कार्यों में कमी आने से रोजगार संबंधी चिंताएँ भी सामने आ रही हैं।
भारत की नई शिक्षा नीति के तहत तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लैब और AI आधारित शिक्षण प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे शिक्षा अधिक व्यावहारिक और आधुनिक बन रही है।अंत में डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक ने कहा कि AI शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आई है। उचित मार्गदर्शन और संतुलित उपयोग के माध्यम से AI को शिक्षा के विकास का सशक्त माध्यम बनाया जा सकता है। भविष्य में AI और मानव बुद्धि का समन्वय शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा।


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