छत्तीसगढ़ कौशल न्युज भखारा:- ग्राम पंचायत तर्रागोंदी (टिपानी) में सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण एवं समाधान शिविर म...
छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
भखारा:- ग्राम पंचायत तर्रागोंदी (टिपानी) में सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण एवं समाधान शिविर में 18 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण बड़ी संख्या में अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर पहुंचे। शासन की मंशा के अनुरूप आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के उद्देश्य से आयोजित इस शिविर में मंच पर जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, लेकिन कई विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए।शिविर में आवेदन प्राप्त करने का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित था। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित समय के बावजूद कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचे। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जिससे उनमें नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब शासन स्वयं सुशासन तिहार के माध्यम से जनता की समस्याओं के समाधान का दावा कर रहा है, तब जिम्मेदार अधिकारियों की देरी और अनुपस्थिति कार्यक्रम की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
ग्रामीणों के अनुसार दोपहर लगभग 1 बजे अधिकारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए रजिस्टर मंगाया गया, जबकि कई अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय तक शिविर स्थल पर मौजूद नहीं थे। इससे यह चर्चा भी शुरू हो गई कि आखिर कार्यक्रम की निगरानी कौन कर रहा है और अनुपस्थित अधिकारियों के प्रति जवाबदेही किसकी है।शिविर में पीएम विश्वकर्मा योजना से संबंधित विभाग की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। योजना का लाभ लेने और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने पहुंचे हितग्राहियों को संबंधित अधिकारियों के नहीं पहुंचने से निराश होकर वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का प्रचार-प्रसार और लाभ पहुंचाने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है, लेकिन शिविर में उनकी अनुपस्थिति से योजना का उद्देश्य प्रभावित हुआ।
वहीं स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। शिविर स्थल पर स्वास्थ्य विभाग का स्टॉल लगाया गया था और ओपीडी सुविधा उपलब्ध होने का दावा किया गया, लेकिन मौके पर आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता नहीं थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराई गई और वास्तविक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। इससे इलाज और दवा की उम्मीद लेकर पहुंचे लोगों को निराशा हाथ लगी।ग्रामीणों का कहना है कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन यदि समाधान शिविरों में ही विभागीय लापरवाही सामने आए तो जनता का भरोसा प्रभावित होता है। लोगों ने मांग की है कि शिविर में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। अब क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि सुशासन तिहार जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सामने आई लापरवाही के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है जनप्रतिनिधि, अधिकारी या संबंधित विभागीय अमला?

No comments