पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल.....लॉगिन आईडी के बहिष्कार का दावा; फिर भी मैदानी जांच कैसे?....गंभीर सवाल

Pradeep Ganjeer
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छत्तीसगढ़ कौशल न्युज 

धमतरी:- छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारी संघ के आह्वान पर 13अक्टूबर से जारी अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल के बीच ग्राम...............में स्वामित्व योजना के तहत दावा-आपत्ति की जांच करने पहुंचे पटवारी का मामला अब सवालों के घेरे में है। जब प्रदेशभर के पटवारी हड़ताल पर हैं और मैदानी कार्यों के साथ ऑनलाइन कामकाज तथा लॉगिन आईडी के बहिष्कार की बात कही जा रही है, तो ऐसे में हल्का क्रमांक 0000 के पटवारी ................. किस आधार पर जांच करने पहुंचे? क्या उन्हें विभागीय स्तर पर कोई निर्देश मिला था, या फिर हड़ताल के दौरान कामकाज को लेकर संघ के भीतर ही एकरूपता का अभाव है?


प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज पटवारी ...............स्वामित्व योजना से जुड़े एक मामले की मैदानी जांच करने के लिए ग्राम ........... पहुंचे। बताया गया कि वे संबंधित रिकॉर्ड लेकर ग्राम पंचायत पहुंचे, जहां सरपंच, उपसरपंच और ग्रामीणों की मौजूदगी में दावा-आपत्ति के मामले की जांच की प्रक्रिया हुई।


मामले के आवेदक ............यादव ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने स्वामित्व योजना के तहत दावा-आपत्ति प्रस्तुत की थी, लेकिन पटवारी निष्पक्ष जांच करने के बजाय एकतरफा निर्णय की मंशा से पहुंचे थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पटवारी का पक्ष सामने आना बाकी है।


मृत व्यक्ति के नाम पर दर्ज करने का आरोप


आवेदक के परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड में जानबूझकर ऐसे व्यक्ति का नाम दर्ज किया गया, जिसकी मृत्यु करीब दो वर्ष पहले हो चुकी है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह योजना के तहत तैयार किए गए अभिलेखों की सत्यता, जांच प्रक्रिया और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।


हड़ताल के नियमों पर सवाल, संघ की भूमिका पर नजर


प्रदेशभर में पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ऐसे में एक ओर कार्यालय बंद रखने, मैदानी कार्यों से दूरी बनाने और ऑनलाइन सेवाओं का बहिष्कार करने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर हड़ताल के दौरान मैदानी जांच के लिए पटवारी के पहुंचने से कई सवाल पैदा हो गए हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पटवारी ...............को जांच के लिए किसी सक्षम अधिकारी ने निर्देशित किया था? यदि हां, तो उस आदेश की प्रकृति क्या थी? यदि कोई आदेश नहीं था, तो हड़ताल के दौरान जांच करने का आधार क्या रहा? साथ ही, क्या इस मामले में पटवारी संघ अपने सदस्य से जवाब-तलब करेगा?


अब कार्रवाई और जवाब का इंतजार


आवेदक द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। संबंधित अधिकारी स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड, दावा-आपत्ति के दस्तावेजों और जांच की प्रक्रिया का परीक्षण करें, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।अब निगाहें राजस्व पटवारी संघ और संबंधित राजस्व अधिकारियों पर टिकी हैं। क्या संघ इस मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा? क्या प्रशासन जांच के आदेश और रिकॉर्ड की स्थिति सार्वजनिक करेगा? या फिर हड़ताल के बीच उठे ये सवाल जवाब के इंतजार में ही रह जाएंगे? इन सवालों का जवाब संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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