छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
धमतरी:- थाना कुरूद क्षेत्र के बोधछापर गाँव के निवासी नरोत्तम साहू एवं उनके परिवार ने गाँव में चल रही दबावपूर्ण दादागिरी, अश्लील गाली-गलौज, मारपीट, आर्थिक उत्पीड़न, सामाजिक बहिष्कार और जान से मारने की धमकी की शिकायत करते हुए प्रशासन एवं पुलिस से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, 21 अक्टूबर 2026 को गाँव की बैठक में दिनेश चंद्राकर, रूपचंद साहू, पवन साहू, राजू राम साहू एवं अन्य लोगों ने नरोत्तम साहू को बोलने से मना कर दिया। पूछने पर कहा गया कि “गाँव से बहिष्कृत हो, नहीं बोल सकते।” इसी दौरान दिनेश चंद्राकर ने अश्लील गाली देते हुए नरोत्तम साहू का कॉलर पकड़कर मारपीट की, जिसमें खून-खराबा भी हुआ। आरोप है कि सभी लोगों ने लाठी-डंडा लेकर तीर्थ राम साहू, नागेश्वर साहू, दुलेश्वर साहू, पूजा साहू सहित परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। उसी दिन हेमंत देवदास के साथ भी मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न की घटना बताई गई है। वे मूर्छित होकर गिरे, खून से लथपथ हो गए और धमतरी मिशन अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराए गए। उनके सिर से कपड़ों तक खून भीग गया था।
नरोत्तम साहू के परिवार को 16 मई 2025 से गाँव से बहिष्कृत कर रखा गया है। रोजी-मजदूरी, लेन-देन, आना-जाना, किसानी कार्य और रामधुनी-रामायण आदि में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाकर उत्पीड़न किया जा रहा है। रात के समय डंडा-लाठी और धारदार हथियार लेकर दहशत फैलाते हुए गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी जा रही है। घर से निकलना मुश्किल हो गया है।आर्थिक उत्पीड़न के उदाहरण भी दिए गए हैं। तीरथ राम साहू से 15,000 रुपये, तेजेंद्र साहू से 2,000 रुपये, परदेसी साहू से 2,000 रुपये, भरत ध्रुव से 5,000 रुपये तथा चंपेश्वर, ओंकार, ओमप्रकाश, पूनमचंद, चंदन आदि से प्रत्येक से 3,000 रुपये वसूले जाने का आरोप है। तेजेंद्र साहू को 10,000 रुपये न देने पर गाँव छोड़ने की धमकी दी गई बताई गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि थाना कुरूद एवं शासन-प्रशासन को कई बार शिकायत करने के बावजूद मारपीट पर FIR दर्ज नहीं की जा रही और कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। पुराने कई आवेदन-प्रतिवेदन संलग्न किए गए हैं। परिवार ने मांग की है कि दिनेश चंद्राकर, रूपचंद साहू, पवन साहू, राजू राम साहू एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध तुरंत FIR दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक उत्पीड़न और दादागिरी पर अंकुश लगाया जाए तथा पुराने आवेदनों पर भी कार्रवाई हो।शिकायत में यह भी लिखा गया है कि यदि उक्त व्यक्तियों के विरुद्ध 15 दिनों के अंदर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती तो पूरा परिवार एवं स्वयं नरोत्तम साहू स्वेच्छा-मृत्यु (आत्महत्या) करने को मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए कानूनी सहायता की अपील की है। भविष्य में परिवार के साथ कोई अनहोनी या हादसा होने पर जिम्मेदारी इन लोगों की होगी, ऐसा भी उल्लेख किया गया है।


