छत्तीसगढ़ कौशल न्युज धमतरी:- थाना केरेगांव क्षेत्र के वर्ष 2024 के एक चर्चित हत्या प्रकरण में माननीय प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय, धमतरी...
छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
धमतरी:- थाना केरेगांव क्षेत्र के वर्ष 2024 के एक चर्चित हत्या प्रकरण में माननीय प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय, धमतरी ने कड़ा निर्णय सुनाते हुए तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपियों को आजीवन कारावास एवं प्रत्येक पर 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह मामला थाना केरेगांव के अपराध क्रमांक 37/24 के तहत धारा 302, 34 एवं 201 भादवि में पंजीबद्ध किया गया था।
घटना का संक्षिप्त विवरण- दिनांक 29 मई 2024 की रात्रि थाना केरेगांव क्षेत्र में पीकअप वाहन चालक पंकज ध्रुव पर चाकू से प्राणघातक हमला कर उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी सउनि. प्रदीप सिंह के नेतृत्व में थाना केरेगांव पुलिस एवं साइबर टीम द्वारा त्वरित एवं सघन विवेचना प्रारंभ की गई।विवेचना के दौरान सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, मुखबिर सूचना एवं प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों द्वारा अपराध स्वीकार करने पर उनके मेमोरेंडम कथन लिए गए, जिसके आधार पर घटना में प्रयुक्त चाकू, मोटरसाइकिल एवं घटना के समय पहने गए कपड़े गवाहों के समक्ष विधिवत जप्त किए गए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने शराब के नशे में मामूली विवाद के दौरान गुस्से में आकर धारदार हथियार से हमला कर पंकज ध्रुव की हत्या की थी। विवेचना पूर्ण कर आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजते हुए समयबद्ध रूप से न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
आरोपीगण
चन्द्रेश देवदास, पिता चित्रसेन देवदास, उम्र 19 वर्ष
हरीश साहू, पिता भूपेन्द्र साहू, उम्र 23 वर्ष
रोशन यादव, पिता स्व. सुमन यादव, उम्र 21 वर्ष
(तीनों निवासी – नयापारा गोकुलपुर, थाना धमतरी, जिला धमतरी)
धमतरी पुलिस एवं थाना केरेगांव पुलिस द्वारा की गई वैज्ञानिक, निष्पक्ष एवं साक्ष्य-आधारित सटीक विवेचना के परिणामस्वरूप माननीय न्यायालय ने तीनों आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।वहीं, इस प्रकरण में उत्कृष्ट विवेचना एवं सराहनीय कार्य के लिए पुलिस अधीक्षक धमतरी द्वारा विवेचक सउनि. प्रदीप सिंह को सेवा पुस्तिका में नगद ईनाम प्रदान कर पुरस्कृत किया गया, ताकि अन्य विवेचकों को भी बेहतर विवेचना के लिए प्रोत्साहन मिल सके।


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