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नवागांव (खिसोरा) में शिक्षा का मज़ाक, स्कूल में ताला—ताले में कैद हुआ बच्चों का भविष्य

छत्तीसगढ़ कौशल न्युज  मगरलोड़ :- विकासखंड मगरलोड़ के ग्राम नवागांव (खिसोरा) स्थित शासकीय माध्यमिक शाला में शिक्षकों की गंभीर लापरवाही सामने ...


छत्तीसगढ़ कौशल न्युज 

मगरलोड़:- विकासखंड मगरलोड़ के ग्राम नवागांव (खिसोरा) स्थित शासकीय माध्यमिक शाला में शिक्षकों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल में तीन शिक्षक पदस्थ हैं, इसके बावजूद आए दिन समय से पहले छुट्टी कर दी जाती है और कई बार स्कूल में ताला लगा रहता है। सरकारी स्कूलों का निर्धारित समय सुबह 9.45 बजे से शाम 4 बजे तक है, लेकिन नवागांव (खिसोरा) स्कूल में इस नियम का पालन नहीं हो रहा। शिक्षकों की मनमानी के कारण पढ़ाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है। हालात यह हैं कि पालक मजबूरी में अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं, जिससे सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है।

            एक ओर शासन द्वारा सरकारी स्कूलों में बच्चों को आकर्षित करने के लिए गणवेश, पुस्तकें, साइकिल, छात्रवृत्ति और मध्यान्ह भोजन जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की लापरवाही के चलते इन योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षक समय पर स्कूल नहीं आते और बीच में ही बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। बच्चों का शैक्षणिक स्तर इतना कमजोर हो गया है कि वे ठीक से हिंदी, अंग्रेजी पढ़ नहीं पा रहे हैं और गणित के सवाल हल करने में भी असमर्थ हैं।

           बताया गया कि हाल ही में प्रभारी प्राचार्य व शिक्षक स्कूल से गायब मिले। इसी दौरान शिक्षक नेमचंद साहू स्कूल में ताला लगाकर जाते हुए नजर आए। पूछे जाने पर उन्होंने बच्चों की छुट्टी का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया और गोलमोल जवाब देकर निकल गए।इसके अलावा शिक्षक नेमचंद साहू पर पूर्व में दो बालिकाओं द्वारा गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। जानकारी के अनुसार विज्ञान प्रदर्शनी में चयनित बालिकाओं को शासन द्वारा मिली लगभग 30 हजार रुपये की प्रत्सोहन राशि के गबन का आरोप शिक्षक पर लगा था। हालांकि बाद में पालकों से माफी मंगवाकर मामला दबा दिया गया, जिसके चलते उच्च अधिकारियों तक शिकायत नहीं पहुंच पाई।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की गई, तो सरकारी स्कूलों से लोगों का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। अब सवाल यह है कि बच्चों के भविष्य से हो रहे इस खिलवाड़ के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?

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