छत्तीसगढ़ कौशल न्युज छत्तीसगढ़:- प्रदेश के शिक्षा विभाग में शीर्ष स्तर पर समन्वय की कमी का सीधा असर अब स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर साफ नजर...
छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
छत्तीसगढ़:- प्रदेश के शिक्षा विभाग में शीर्ष स्तर पर समन्वय की कमी का सीधा असर अब स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर साफ नजर आने लगा है। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा एक ही अवधि में जारी किए गए अलग-अलग निर्देशों के चलते स्कूलों में परीक्षाओं का अंबार लग गया है। इससे लाखों छात्र-छात्राएं और शिक्षक गंभीर मानसिक दबाव में हैं। छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा है कि माशिमं और DPI के बीच तालमेल के अभाव ने शैक्षणिक व्यवस्था को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। एक ओर जहां प्रायोगिक परीक्षाएं और प्रोजेक्ट वर्क अनिवार्य किए गए हैं, वहीं उसी समय प्री-बोर्ड परीक्षाएं कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
जिला संरक्षक राजेंद्र चंद्राकर का कड़ा रुखइस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला संरक्षक राजेंद्र चंद्राकर ने कहा, “विभाग के भीतर तालमेल की भारी कमी स्पष्ट दिखाई दे रही है। छात्र प्रायोगिक परीक्षाओं की तैयारी करें या प्री-बोर्ड की—यह तय करना ही मुश्किल हो गया है। ऐसे अव्यावहारिक निर्णय छात्रों को मानसिक तनाव में डाल रहे हैं और शिक्षकों के लिए एक ही समय में दोहरी व्यवस्था संभालना असंभव हो गया है। प्रशासन को जमीनी हकीकत समझते हुए तिथियों में तत्काल संशोधन करना चाहिए।”
समस्या की जड़
माशिमं का निर्देश: 10वीं और 12वीं की प्रायोगिक परीक्षाएं एवं प्रोजेक्ट वर्क 1 से 20 जनवरी के बीच अनिवार्य।
DPI का फरमान: इसी अवधि में 15 जनवरी तक प्री-बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करने का दबाव।
तहसील अध्यक्ष राजेश पाण्डेय की अपील...तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के तहसील अध्यक्ष राजेश पाण्डेय ने विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते समय-सारणी में सामंजस्य नहीं बैठाया गया, तो स्कूलों की पूरी व्यवस्था पटरी से उतर जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो कर्मचारी संघ आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इन सदस्यों ने बुलंद की आवाज..इस मुद्दे पर त्वरित निराकरण की मांग करने वालों में वर्षा केला, अविनाश साहू, मकसूदन पटेल, कमल सार्वा, भावेश चन्द्रवंशी, ऋचा शर्मा, सुमन शर्मा, तामसिंग साहू, जगदीश साहू, धनजय ठाकुर सहित संघ के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल हैं।
प्रमुख मांगें
प्रायोगिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं की तिथियों के बीच पर्याप्त अंतराल सुनिश्चित किया जाए। प्रयोगशाला संसाधनों और शिक्षक ड्यूटी के बेहतर प्रबंधन हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने के लिए तत्काल नई और व्यवहारिक समय-सारणी घोषित की जाए। कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन की जिम्मेदारी पूरी तरह विभागीय प्रशासन की होगी।



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