छत्तीसगढ़ कौशल न्युज
कुरूद:- ग्राम कातलबोड़ के प्रेम सागर दुर्गोत्सव चौक में पिछले 35 वर्षों से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद वध का मंचन बरगद के पेड़ के नीचे हो रहा है। विडंबना है कि दशकों पुरानी इस सांस्कृतिक परंपरा के बावजूद कलाकारों को आज तक स्थायी रंगमंच शेड की सुविधा नहीं मिल पाई है। हर साल टेंट-पंडाल लगाकर नाटक का मंचन किया जाता है, जबकि बारिश के दौरान आयोजन प्रभावित होता है।प्रेम सागर दुर्गोत्सव एवं नाट्य मंडली के कलाकारों के अनुसार, शेड निर्माण के लिए कई बार सरपंच से मांग की गई। ग्रामसभा में भी प्रस्ताव रखे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। कलाकारों का कहना है कि मांग करने पर सरपंच द्वारा विधायक, सांसद या जिला पंचायत सदस्य से राशि स्वीकृत करवाकर लाने की बात कही जाती है।
पिछले दशहरे पर भारी बारिश के कारण दो दिनों तक रावण वध का मंचन नहीं हो सका। तीसरे दिन भी बारिश के बीच समिति के कलाकारों ने पेट्रोल डालकर रावण दहन की रस्म पूरी की। यह स्थिति आयोजन के लिए स्थायी मंच की जरूरत को उजागर करती है।मोहल्ले के करीब 165लोगों की भावनाएं इस आयोजन से जुड़ी हैं। इसके बावजूद वर्षों से रंगमंच शेड की मांग पूरी नहीं हो सकी है। समिति ने संबंधित जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रशासन से शेड निर्माण के लिए पहल करने की मांग की है, ताकि कलाकारों को सुरक्षित मंच मिल सके और परंपरा का निर्वहन व्यवस्थित ढंग से हो सके।


